शब्दों को जोड़कर यूँ ही

द्वारा मयूर On 2:54 PM

पिछले तीन दिनों से बिल्कुल भी समय नही मिला की कुछ लिखूं और जब समय मिला तो कुछ भी तैयार नही था ,अभी मुझे अपनी एक पुरानी कविता की कुछ पंक्तिया याद आयीं ,पुरी तो नही पर कुछ हिस्सा लिखने की इक्षा है । दिन का ढेर सारा समय हिन्दी ब्लोग्स पड़ने में बीत जाता है , फिर भी कुछ ठोस नही मिल रहा की अपने से कुछ लिख सकूँ , कुछ दिनों पहले रविश जी के ब्लॉग पर मैंने पड़ा उन्होंने विज्ञापन का अंडरवियर काल शीर्षक से एक पोस्ट लिखी थी ,पड़कर बड़ा सुकून हुआ और अपने टीचर श्री मनोहर श्याम चौरे जी की याद आई ,वे बहुत ऊँचे कोटि के पत्रकार रहे हैं , आजकल माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्विद्यालय मैं अपनी सेवाएँ दे रहे हैं , वे हमेशा हमें बताते रहते है के लिखने के लिए विषय से ज्यादा जरूरी है इक्षा का होना ,आप के पास हजारों के तादाद मैं विषय होते हैं , सुबह के उठने से लेकर रात को सोने तक ,सुई से तलवार तक और साइकिल से मोटर कार तक ,आप लोगों के ऊपर लिख सकते है ,भगवन को चढाय जाने वाले भोगों के ऊपर लिख सकते है और अगर थोडी ठीकठाक जानकारी रखते हों तो बरसात मैं होने वाले रोगों पर भी लिख सकते हैं ,पर अब तीन साल की पडी के बाद लगता है की सब मट्टी पालित हों गई कुछ भी ढंग का नही सीखा । खैर अभी भी कुछ नही गया है ,बहुत कुछ हों सकता है ,किया जा सकता है ।

वादे के मुताबित अब मैं एक कविता भी लिख रहा हूँ ,मैं जानता हूँ की अभी मैं अच्छा नही लिख पता पर फिर भी मैं कोशिश कर रहा हूँ,ये कविता मैंने काफी पहले कुछ लिखे के ऊपर ही लिखी थी

शब्दों को जोड़कर यूँ ही कुछ कहा जाता है क्या ,

अपना गुस्सा इन शब्दों पर उतरा जाता है क्या ,गलतियाँ ख़ुद करें बड़े आप बने ,

और कहें सारा जहाँ ख़राब है , इससे काम चलता है क्या , बदलावों को महसूस किया शायद ये अच्छा है ,पर अच्छा है महसूस किया ये अच्छा है क्या ।

6 टिप्पणी

  1. अपना गुस्सा इन शब्दों पर उतरा जाता है क्या ,गलतिया ख़ुद करें बड़े आप बने ,
    और कहें सारा जहाँ ख़राब है , इससे काम चलता है क्या , बदलावों को महसूस किया शायद ये अच्छा है ,पर अच्छा है महसूस किया ये अच्छा है क्या ।
    bhut aache. likhate rhe.
    aap apna word verification hata le taki humko tipani dene mei aasani ho.

    Posted on June 25, 2008 at 5:02 PM

     
  2. bahut khuuub likha--lekin shbdon par gussa na utaaren...

    achcha likha hai--aur likheeye--shbdon par gussa utarna hi hai to--unhen kalam se bahar layeeye--:)
    shubh kamnyen

    Posted on June 25, 2008 at 8:27 PM

     
  3. This comment has been removed by the author.

    Posted on June 25, 2008 at 8:28 PM

     
  4. garam tave par magj maari---bahut hi anootha sa ---shirshak hai--ek dum hat ke!!:D

    Posted on June 25, 2008 at 8:29 PM

     
  5. अपना गुस्सा इन शब्दों पर उतरा जाता है क्या????

    लिखते रहिये.

    Posted on June 25, 2008 at 10:10 PM

     
  6. sourabh Said,

    achha hai, lage raho.
    bahut shubhkamnaye

    Posted on June 25, 2008 at 11:33 PM